Monday, January 16, 2012

अजीब दास्ताँ है ये !!!

           नमस्कार , ब्लॉग परिवार के मेरे सभी सदस्यों को मेरा बहुत दिनों बार एक सादर नमस्कार | जानती हूँ बहुत दिनों बाद आना हो पा रह है आपके बीच , सच मानिये इन दिनों बहुत मिस किया आप सबको | इस दौरान बहुत कुछ हुआ जीवन में, ज़्यादातर अच्छा या शायद बहुत ही अच्छा था, कुछ कडवे पल भी थे, पर इन दोनों के मिश्रण में अच्छे पल ज्यादा थे | जैसा कि आप सभी जानते हैं मैंने फिर से पढ़ाई शुरू कर दी है, अब मास्टर्स कर रही हूँ सोशल वर्क में | कुछ सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए इसे करना शायद ज़रूरी था | मेरे ब्लॉग परिवार के भी कुछ सदस्यों ने ठीक एक परिवार कि तरह मेरा साथ निभाया | इनमे से कुछ लोगों का नाम में खास तौर पर लेना चाहूंगी मेरे परिवार के वो सदस्य हैं विजय माथुर सर , यशवंत , सुबीर सर  ये वो नाम हैं जिन्होंने मेल, फेसबुक या किसी ना किसी तरीके से मुझे ये एहेसास कराया कि हार नहीं माननी है | आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद |

                                 पिछले कुछ महीनों में कुछ उपलब्धियां भी मेरे हिस्से में आयीं | मुझे मेरे डिपार्टमेंट कि मिस फ्रेशेर चुना गया | साथ ही इस दौरान मुझे यूनिवर्सिटी लेवल के कई प्रोग्राम ओर्गनाईज करने के मौके भी मिले | जिसके लिए मुझे काफी ज्यादा प्रोत्साहित किया गया, और कई पुरस्कार भी मिले | अच्छा लगता है जब आपके काम कि तारीफ होती है, जोश बढ़ जाता है |  खैर ये सब तो रहीं वो बातें जो मेरी कुछ छोटी मोटी  उपलब्धियों से जुड़ी हैं | इस दौरान एक और बहुत अच्छा मौका मुझे और मिला, सोशल वर्क के स्टूडेंट को किसी  स्वयं सेवी संस्था से भी जुडना पडता है | बहुत सोचने विचारने के बाद मैंने अपने एक सपने को ही इसी चुनने का अधार बनाया, मैंने जिस संस्था से खुद को जोड़ा उसका नाम शायद आप सबने सुना होगा, उसका नाम है "हेल्प एज इण्डिया "| यहाँ बुजुर्गों के साथ काम करने का खास तौर पर उनकी हे़ल्थ से जुड़े मुद्दों को देखने और समझने का मौका मिला |

            इस दौरान दो केस मेरे हाथ में आये | स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाए तो संस्था उन्हें पहेले ही दे रही थी | हमारा काम उनकी स्टडी, डैग्नोसिस और ट्रीटमेंट देना है | ये दोनों केस दो वृद्ध महिलाओं के थे | जो दोनों हो ७० वर्ष से ऊपर की आयु कि हैं | संस्था उनके स्वास्थ्य का इलाज निशुल्क कर रही है | पर उनसे बात चीत के दौरान पता चला कि उनकी ये समस्या शारीरिक के कई गुना ज्यादा मानसिक और सामाजिक है | वही अकेलापन, बुढ़ापे में औलादों का साथ ना देना और आर्थिक समस्या | कुछ देर के लिए तो थोड़ी उपसेट हो गयी थी, सोच कुछ मदद कर दूं | पर फिर याद आया कि सोशल वर्क हमें क्या सिखाता है | हमारे यहाँ असली मदद वो होती है जो आजीवन चले और क्लाइंट को दोबारा वो समस्या ना हो  और वो आत्मनिर्भर बन सके |

                    थोडा विचारने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यूँ ना इन्हें कोई सरकारी मदद दिलवा दी जाये|  एक वकील से परामर्श लिया कि ऐसी कौन कौन सी सरकारी योजनाये हैं जो इनके मदद कर सकतीं हैं | सब कुछ पता लगाने के बाद एक योजना मुझे सही लगी, योजना के नाम नहीं बताऊंगी, क्या पता इसे भी लोग चुनाव प्रचार का तरीका समझ लें | तो मैं ऐसा कोई भी प्रयास नहीं करना चाहती | खैर उस योजन से जुड़े फॉर्म मैंने उन दोनो से भरवाए, कुछ खास कागज के ज़िरोक्स कराये | और पूरा कार्य करके सारे कागज अपनी संस्था की एक्जीक्यूटिव को दिए ताकि वो संस्था के माध्यम काम को तेज़ी से आगे बढ़ाएं |
     अभी काम पूरा तो नहीं हुआ है पर लगभग अंतिम चरण पर है | संस्था को भी मेरा ये प्रयास अच्छा लगा | और अब काम बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है | जल्द ही दोनों क्लाइंट्स को पेंशन मिलाने लगेगी | वो दोनों अम्मा जी जिस तरह से मुझे आशीर्वाद दे रहीं थी यकीन मानिये अगर थोड़ी देर भी और वहाँ रुकती तो रो पड़ती | उनके घर की स्थिति भी बहुत खराब थी | उनमे से एक अम्मा जी को तो अब दिखता भी नहीं था | दोनों के दो- दो तीन तीन बेटे बहुएं पर सबने उन्हें अपने से अलग कर दिया |
      ये बुढ़ापा केसे कटेगा वो बार बार यही कह कर रोतीं रहीं | बहुत बुरा लग रहा था | ऐसा लग रह आता कि काश भगवान मुझे कोई शक्ति दे दे और मैं इनके सरे दुःख खतम कर दूं | पर ये तो हो नहीं सकता | इसलिए जो कर सकती हूँ वो करने कि कोशिश कर रही हूँ |
     जानती हूँ दुनिया को नहीं सुधार सकती | पर जितना  कर सकती हूँ उतना तो करूंगी ही | कम से कम जब तक जिन्दा हूँ तब तक तो हार नहीं मानूंगी | और वैसे भी जिसके साथ उसके परिवार [ फिर चाहे वो मेरा अनुवांशिक परिवार हो या नेट या ब्लॉग का परिवार ] का आशीर्वाद होता है वो देर से ही सही सफल ज़रूर होता है |  आशा है इतने दिनों बाद अपनी ये कहानी सुना कर आप सबको बोर नहीं किया होगा |
                                                                                                                        नमस्कार |                      

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