Thursday, August 11, 2011

महान वैज्ञानिक का जन्मोत्सव |



भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डा. विक्रम अंबालाल साराभाई ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र 

में अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहुँचाया। उन्होंने अन्य क्षेत्रों में भी समान रूप से पुरोगामी योगदान दिया: वे 

अंत तक वस्त्र, औषधीय, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य क्षेत्रों में लगातार काम करते रहे।

डॉ. साराभाई एक रचनात्मक वैज्ञानिक, एक सफल और भविष्यदृष्टा उद्योगपति, सर्वोच्च स्तर के प्रर्वतक, 

एक महान संस्थान निर्माता, एक भिन्न प्रकार के शिक्षाविद्, कला के पारखी, सामाजिक परिवर्तन के 

उद्यमी, एक अग्रणी प्रबंधन शिक्षक तथा और बहुत कुछ थे।

डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म पश्चिमी भारत में गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर में 12 अगस्त 1919 

को हुआ था। साराभाई परिवार एक महत्वपूर्ण और संपन्न जैन व्यापारी परिवार था। उनके पिता अंबालाल 


साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे तथा गुजरात में कई मिलों के स्वामी थे। विक्रम साराभाई, अंबालाल 

और सरला देवी के आठ बच्चों में से एक थे।


इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा पास करने के बाद वे इंग्लैंड चले गए और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सेंट 

जॉन कॉलेज में भर्ती हुए। उन्होंने केम्ब्रिज से 1940 में प्राकृतिक विज्ञान में ट्राइपॉस हासिल किया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बढ़ने के साथ, साराभाई भारत लौटे और बेंगलौर के भारतीय विज्ञान संस्थान में भर्ती 

हुए तथा नोबेल पुरस्कार विजेता, सर सी. वी. रामन के मार्गदर्शन में ब्रह्मांडीय किरणों में अनुसंधान शुरू

 किया।


युद्ध के बाद 1945 में वे केम्ब्रिज लौटे और 1947 में उन्हें उष्णकटिबंधीय अक्षांश में कॉस्मिक किरणों की 

खोज शीर्षक वाले अपने शोध पर पी.एच.डी की डिग्री से सम्मानित किया गया।

30 दिसंबर,1971 को कोवलम, तिरुवनंतपुरम, केरल में डॉ. विक्रम साराभाई का निधन हो गया।

पुरस्कार

शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार (1962)
पद्मभूषण (1966)
पद्म विभूषण, मरणोपरांत (1972)


महत्वपूर्ण पद

भौतिक-विज्ञान अनुभाग, भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष (1962)
आई.ए.ई.ए., वेरिना के महा सम्मलेनाध्यक्ष (1970)
उपाध्यक्ष, 'परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग' पर चौथा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (1971)

सम्मान
रॉकेटों के लिए ठोस और द्रव नोदकों में विशेषज्ञता रखने वाले अनुसंधान संस्थान, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष 

केंद्र (वीएसएससी) का नामकरण उनकी स्मृति में किया गया, जो केरल राज्य की राजधानी तिरूवनंतपुरम 

में स्थित है।

1974 में, सिडनी में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने निर्णय लिया कि सी ऑफ़ सेरिनिटी में स्थित चंद्रमा क्रेटर 

बेसेल (बीईएसएसईएल) डॉ. साराभाई क्रेटर के रूप में जाना जाएगा।

2 comments:

: केवल राम : said...

उपयोगी और तथ्यात्मक जाकारी के लिए आपका आभार

सुशील बाकलीवाल said...

इस जानकारीपरक आलेख के लिये आभार...

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