Thursday, March 24, 2011

कुछ याद आया ?

                   अपनी आज की इस पोस्ट के बारे मैं कुछ भी बताने से पहले एक बात तो मैं दावे के साथ कह सकती हूँ की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद तक़रीबन 90 प्रतिशत रीडर्स के चहरे पर मुस्कराहट तो आयेगी ही आयेगी | एक ऐसी मुस्कराहट जो कहीं न कहीं आपको आपके अतीत से जोड़ देगी | वो अतीत जो शत -प्रतिशत हम सब से जुड़ा हुआ है और शायद वो हमारे वर्तमान का भी हिस्सा हो | भाई मेरे तो है अब आपका मैं नहीं जानती | दिमाग पर ज्यादा जोर देने की ज़रुरत नहीं है | इससे पहले मैं कुछ और लिखूं आप एक तस्वीर देखें |

                                                      
                                       क्यूँ याद आ गया न | आ गयी न चेहरे पर एक मीठी सी बचपन वाली मुस्कराहट | 
कैरम हकीकत में हम सभी के बचपन का एक खूबसूरत और बेहद ही प्यारा हिस्सा है | वो हिस्सा जो गर्मियों की छुट्टियों में शुरू होता था फिर चाहे वो अपना घर हो या पड़ोस में रहने वाले हमारे दोस्त और सहेली का | मम्मी की रसोई या फिर पड़ोस से आती आवाज़ '' बेटा अब बस बहुत हो गया नहाना धोना है या पूरे दिन कैरम में ही लगे रहोगे | हे भगवान् ये बच्चे छुटियाँ हुयी नहीं की पूरे दिन बस कैरम कैरम |"  
                            यही तो होता था ना | बचपन बीत गया पर आज भी शायद घर के स्टोर रूम में आपका पुराना कैरम आपका इंतज़ार कर रहा होगा | लेकिन आपमें से किसी ने क्या कभी ये जानने की ये कोशिश कि कि हम सब का पसंदीदा कैरम आखिर आया कहाँ से ? अपने एक शोध के बाद जो कुछ मुझे पता चला वो काफी रोचक है और आज इसे ही में आपके साथ बांटने जा रही हूँ |


    कैरम के इतिहास को लेकर कहीं ना कहीं आज भी संशय कि स्थिति बनी हुयी है | पर सभी आंकड़ों को देखने के बाद अनुमानतः ये कहा जा सकता है कि कैरम का इतिहास तक़रीबन 200 साल पुराना यानि लगभग 1889 के आस पास है | कुछ लोग इसे भारत से ही उपजा बताते हैं जबकि कुछ इसे बर्मा और पुर्तगाल से भी जोड़ते हैं |  असल में ये टेबिल - टॉप परिवार का है | जिसे अलग अलग jaghon पर अलग अलग नाम से पुकारा जाता है | पश्चिम के कुछ देशों में इसे फिंगर बिलियर्ड्स भी कहा जाता है |  जबकि अपने देश में ही पंजाब में इसे ' फट्टा ' कहते हैं | फिजी में इसी से मिलता जुलता खेल vindi -vindi हैं | इसराइल में ऐसा ही एक खेल szha कहलाता है |  नोर्थ  अमेरिका और कुछ अन्य यूरोपीय देशों में इसे crokinole [ नोर्थ  अमेरिका ],pitchnut और novuss [लात्विया ,इस्टोनिया ] ,chapavev [Russia]  में , bobspil [denmark] आदि namon से पुकारा जाता  है |


                          भारत में एक मानक कैरम का साइज़ 29 इंच होता है | इसे जिस डिस्क से खेला जाता है जिसे हम साधारण भाषा में गोटी कहते हैं उसे अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर कैरम मैन  कहा जाता है | इसके अलावा इसके अन्य नाम puck ,coin  और seed भी कहते हैं | जिसका आकार 3.02 cm से 3.18 cm के बीच और वज़न 5 से 5.5 ग्राम के बीच होना चाहिए | एक अन्य बड़ी डिस्क स्ट्राइकर कहलाती है | जिसका आकार 4.13 cm और वज़न 15 ग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए | खेल मई एक खास गोटी होती है जिसे queen यानि रानी कहा जाता है | ये होती तो अन्य गोटिओं कि ही तरह है पर इसका रंग लाल होता है |  शेष सभी गोटियाँ काली और सफ़ेद ही होतीं हैं |

                                                                         कैरम शब्द कि उत्पत्ति संभवतः दक्षिण पूर्व एशिया  के तिमोर से मानी जाती है | जहाँ से पुर्तगालियों के साथ होता हुआ ये मालाबार तटों के ज़रिये ये भारत पहुंचा |  पर इतिहास मिले ज़्यादातर साक्ष्य इसे पुर्तगालियों से ही जोड़ते हैं |  अगर किसी निश्चित तिथि कि बात करें तो एशिया मे कैरम से जुड़ा पहला टूर्नामेंट 1935 मे श्रीलंका मे खेला गया था | 1958 मे भारत और श्रीलंका ने एक 'फेडरेशन ऑफ़ कैरम क्लब ' स्थापित किया | इस फेडरेशन से जुड़ा पहला मैच 1960 के आस पास भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया | इस टूर्नामेट मे अफगानिस्तान , पकिस्तान , मलेशिया और मोलदीव जैसे देशों ने हिस्सा लिया | 60 के दशक में यूरोपीय देशों मे इस खेल से जुड़े मैच होने लगे लगे | 1970 तक आते आते इस खेल का पूरी तरह से व्यवसायीकरण हो गया था | इस दशक के अंत तक आते आते  स्विट्ज़रलैंड , जर्मनी और  होलैंड जैसे देश भी इस खेल में उतर आये |
        1980 तक आते आते इस खेल से  जुडी  अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं पूरे विश्व में होने लगी | इसी दौरान 'अंतर्राष्ट्रीय कैरम फेडरेशन क्लब ' की  स्थापना  हुयी |  पहली कैरम कांग्रेस 1988 में हुयी | पहला अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट 1989 में खेला गया | इस अंतर्राष्ट्रीय संगठन से आज लगभग सभी देशों के फेडरेशन जुड़े है |


ये सच है कि इतिहास हमेशा रोचक होता है | पर अगर वही इतिहास हमसे जुड़ा हो तो कही ना कही हमारी रूचि और भी बढ़ जाती है | कैरम आज भी हमारी ज़िन्दगी का ही एक हिस्सा है जो अल्प रूप में ही सही पर अपने अस्तित्व को बनाये हुए है | आज भी ये खेल इनडोर खेलों में बच्चों की और बच्चे ही क्यूँ बड़ों की भी पहली पसंद है |  आज भी गर्मियों की छुट्टियों में धूल से बाहर आता कैरम हर  घर में देखा जा सकता है |
                                                         तो चलो क्यूँ ना इस बार फिर गर्मियों की छुट्टियों में अपने बचपन की यादें ताज़ा करें | और हो जाये एक मैच !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

 
 

3 comments:

Vijai Mathur said...

वाकई बचपन में खेला है कैरम.खेलते वक्त दिलचस्पी बनी रहती है.आपने इसका इतिहास भी मनोरम ढंग सेबता दियाहै .आपको बहुत बहुत धन्यवाद एवं आशीर्वाद ,इसी प्रकार जानकारी देती रहें.

दर्शन कौर धनोए said...

बचपन से लेकर आज तक कैरम हमारा पारिवारिक गेम है

सुबीर रावत said...

कृति जी, सर्व विदित है कि भविष्य अनिश्चित होता है, वर्तमान कष्टदायक और अतीत मीठा. और इसीलिए अतीत को बार बार चुभला कर वैसा ही स्वाद पाने के लिए आदमी प्रयास करता है. आप तो सुदूर अतीत में ले गयी हैं इस पोस्ट के माध्यम से.......... जगजीत सिंह जी की आवाज में सुदर्शन फाकिर साहब की वह ग़ज़ल तो आपने सुनी ही होगी-"ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, चाहे छीन लो मुझसे मेरी जवानी ........... वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी......." अनेकानेक शुभकामनाओं सहित

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