Thursday, February 24, 2011

जीने दो

           लोकतंत्र पर आस्था और विश्वास रखने वाले इस देश की एक विडम्बना है , हर बार  देश में जब कभी भी रिज़र्वेशन  यानि आरक्षण की बात होती है तो हमारा ध्यान जाता है अनुसूचित जाति और जनजाति पर | हर बार चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार आज भी सिर्फ इन्ही के आरक्षण की ही बात करते हैं | ये भूल कर की जब ये आरक्षण व्यवस्था शुरू हुई थी तो असल में इसका मकसद क्या था ? इसका मकसद था देश के पिछड़े वर्ग को देश की मुख्य धारा से जोड़ना | पर क्या आज ये आरक्षण अपने असल मुद्दे पर कायम है | नहीं ! ये असल में अपना असली उद्देश्य भूल गया है | ये पहचान ही नहीं पा रहा है की असल में इस आरक्षण का असली हक़दार कौन है | 
 ये है समाज का वो वर्ग जिसे असल में आरक्षण की ज़रुरत है |  मंगलामुखी  | स्वयं को अर्धनारीश्वर भगवान शिव का हिस्सा बताने वाला ये समाज का वो हिस्सा जो हमारे समाज का होकर भी हमारा नहीं है | जो आज भी अपने हक़ के लिए लड़ रहा है | 

                                  हमारे समाज में आज भी इन मंगलामुखियों को बहुत अजीब सी नज़रों से देखा जाता है |
यदि आज की स्थिति की बात करें तो हमारे देश में लगभग २ करोड़ [ एक मंगलामुखी के ही अनुसार ] मंगलामुखी  हैं |  एक मंगलामुखी से वार्ता के दौरान इस समाज की एक अजीब सी छवि उभर कर सामने आई |  ऊपर से बहुत ही सख्त दिखने  वाला ये समाज असल में समाज की प्रताड़ना और अवमानना का लगातार  शिकार हो रहा है | एक प्रोजेक्ट  के दौरान इस समाज से रूबरू होने का जब मुझे मौका मिला तो सारी हकीकत खुद-ब-खुद  सामने आ गयी | सामने आया वो सच  जो हकीकत  में इन लोगों  को झेलना पड़ रहा है | 
                

 इन लोगों के बारे  में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए मै अपने ही शहर की अलग अलग गद्दियों  पर गयी , और इन लोगों से जानी इनकी असल ज़िन्दगी | इनकी ज़िन्दगी का वो कड़वा पहलू जिससे ये समाज हर रोज़ दो चार होता है|                                                          
एक मंगलामुखी ने बताया की  समाज में जब भी कभी इस तरह का बच्चा पैदा होता है तो ज़्यादातर तो परिवार खुद ही उन्हें सौंप जाता है नहीं तो ये खुद उन्हें जाकर ले आते है | इनका साफ़ कहना है की परिवार  बढ़ाने का इनके पास सिर्फ यही एक जरिया है | इस दौरान मेरी मुलाकात  एक गद्दी पर ऐसी ही एक बच्ची से हुई  | पहले तो मैंने इसे आम बच्ची समझ कर ज्यादा ध्यान नहीं दिया , पर एक मंगलामुखी के बताने पर मेरा ध्यान खास तौर पर उस बच्ची पर गया |  बेहद खूबसूरत और मासूम  मगर आम सी दिखने वाली ये लड़की  कहीं से भी और बच्चों से अलग नहीं लग रही
थी | आम लड़कियों की तरह खूब सजी संवरी और मुस्कुराते  हुए मुझे देख रही थी | समझ नहीं आया की क्या हो रहा है | मेरे ये पूछने पर की वो जब बड़ी हो जायेगा तो क्या बनेगी , तो उसका जवाब था की वो डाक्टर बनेगी | सच कहूं तो मैं उस वक्त कुछ कहने के लायक ही नहीं थी | दिमाग और दिल में सिर्फ एक ही सवाल चल रहा था  कि आखिर क्या होगा इस मासूम के सपनों का | वो सपने जो यक़ीनन आज कि परिस्थितियों में तो कभी भी सच नहीं होंगे |  कैसा लगेगा  जब 13-14 साल तक एक लड़की कि ज़िन्दगी जीने वाली ये बच्ची एक दिन अचानक खुद को आइने में एक नए रूप में देखेगी | कैसे स्वीकार करेगी ज़िन्दगी की ये सच्चाई | सिर्फ और सिर्फ सवाल ही घूम रहे थे मेरे ज़हन में |  
       क्यूँ हमारा समाज इन लोगों को भी अपने सपने पूरे करने का हक़ नहीं देता ? क्यूँ नहीं बन सकती ये बच्ची डाक्टर ?  सिर्फ इसलिए क्यूंकि प्रकृति ने उसे आम नहीं बनाया | पर इसमे इसका क्या दोष है | और असल में दोष तो किसी का भी नहीं है | पर इनके सपनों को पूरा करने का कोई तो तरीका होगा |
      इसी गद्दी पर मेरी मुलाकात एक दिल्ली यूनिवर्सिटी के पढ़े मंगलामुखी से भी हुई | उसने भी मुझे अपने अनुभवों के बारे मैं बताया | उसने बताया कि कैसे उसने समाज के गंदे और घिनौने ताने झेल  कर अपनी पढाई   पूरी की | पर क्या फायदा इस पढाई का आज कर तो वही रही है जो बाकि के मंगलामुखी करते हैं | नौकरी का सपना तो बस सपना ही रह गया |
  
        शहर के एक इलाके की पार्षद भी एक मंगलामुखी है | देश की सक्रीय राजनीति का हिस्सा बनी काजल किरण ने भी अपने समाज के बारे मे बताया | उन्होंने बताया कि उनके समाज में भी अब फ्रौड केसेज़ सामने आने लगे हैं | आज के आंकड़े यदि देखें तो लगभग 60 प्रतिशत से ऊपर तो फ्रौड केसेज़ हैं जो असल में मंगलामुखी हैं ही नहीं |  असल में यही वो लोग हैं जो हमारे समाज को बदनाम कर रहे हैं | अपने गुरुओं का बेहद सम्मान करने वाला ये समाज जो आम लोगों कि खुशियों में शरीक होकर अपने ग़म को पूरी तरह से भूल जाता है | वो भूल जाता है कि उनकी ज़िन्दगी मे असल में कभी खुशियाँ आयेंगी ही नहीं |
          बातों ही बातों में एक मंगलामुखी काफी भावुक हो गया | उसने मुझे अपने समाज से जुडी कुछ खास प्रथाओं और संस्कारों के बारे में भी बताया | पर वो बातें मैं आपको नहीं बता सकती | क्यूंकि उसने बेहद विश्वास के साथ ही मुझे अपने समाज के छिपे पहलुओं के बारे में बताया था | आज वो इस दुनिया में नहीं है, पर उसके वो आंसू मुझे आज भी कुछ देर के लिए परेशान कर देते हैं | वो बार बार रो रहा था और ये कह रहा था कि दिन तो किसी तरह गाने बजने में कट जाता है पर रात उन्हें उनकी असल ज़िन्दगी याद दिला देती है | उनका परिवार उनसे संपर्क में तो है पर सामाजिक रूप से उन्हें स्वीकार नहीं कर पता | हर रात इस उम्मीद में सोते हैं कि शायद कोई चमत्कार हो जाये और हम भी आम ज़िन्दगी जीने लगें | पर हर नयी सुबह उगने वाला सूरज जैसे शायद  हमे चिढाते हुए ये कहता है  कि बस अब सपने देखना बंद करो और हकीकत से सामना करो |
           


पर अब कुछ उम्मीद दिख रही है | सरकार द्वारा जनगणना में इस बार थर्ड जेंडर को भी शामिल कि जाने कि बात कही गयी है |  शायद कुछ हो | शायद  सच हो सकें इस समाज के सपने | शायद अब इस समाज का कोई बच्चा बड़े होकर डाक्टर और इंजीनियर बन सके | वो भी देख सके वो सपने वो पूरे होंगे | और उन्हें भी दिलाएंगे इस समाज में एक सशक्त स्थान |

       ऐसा लगता है  हर बार उस बच्ची की मुस्कान मुझसे यही कहती है| कि आखिर कब आइने में खुद को देखकर अफ़सोस नहीं होगा |  कब मैं बड़ी होकर भी इस बात का अफ़सोस नहीं करूंगी की मैं आखिर पैदा ही  क्यूँ हुई |
       समाज का ये वर्ग अब हमें याद दिला रहा है की अगर हमने हर बात पर अपनी सोच बदल दी है , तो इस बात पर क्यूँ नहीं | ये समाज अब कह रहा है कि अब हम भी जीना चाहते हैं , खुले आकाश में साँस लेना चाहते हैं| हम भी बैग लटकाकर स्कूल जाना चाहते हैं, हम भी दोस्तों के साथ कॉलेज कैंटीन में जोर जोर से टेबिल बजाना चाहते हैं और हम भी कंधे पर लेपटॉप लटकाकर ऑफिस जाना चाहते हैं  | हमें भी अब अपने सपने पूरे करने दो हमें भी जीने दो , अब हमें भी जीने दो |  


22 comments:

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

इतना ही कहूँगा । कमाल हैं कृति जी आप भी ।

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

ब्लाग वर्ल्ड काम का एड्रेस
blogworld-rajeev.blogspot.com/

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

धन्यवाद .. आज आप मेरी चर्चा में चर्चामंच पर आयीं ... अच्छा लगा आपका आना... जरूर नए ब्लोगर्स को प्रोत्साहन देना भी हमारा लक्ष्य है.. और उनकी पहचान भी.. मंच इसी लिए है... किन्तु सर्फिंग के दौरान हमें जो नए ब्लोग्स मिलते हैं ..उन्हें जरूर शामिल करते हैं...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

हमारा समाज तो ऐब सभी में ढूंढता है.. कुछ ना भी हो तो कुछ ढूंढता है... सो सबको अपने मार्ग में नेक कार्य करते हुवे आगे बढ़ना चाहिये ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इस समाज के लिए सरकार से ज्यादा समाज को पहल करनी चाहिए ....आपका लेख पढ़ इन लोगों के प्रति मन संवेदना से भर गया ...इनको भी अपनी तरह से जीने का और अपने सपने पूरा करने का हक है ...इस लेख के लिए आभार



कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

मनोज कुमार said...

अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आना। शुभकामनाएं।
आप अच्छा लिखती हैं। फॉलोअर बन गया हूं, आगे भी आते रहेंगे।
संगीता जी की सलाह पर ध्यान दें।

यशवन्त माथुर said...

बहुत अच्छा और विचारणीय लेख.

Vijai Mathur said...

विचारणीय लेख पर अवश्य ही सरकारों को ध्यान देना चाहिए.

सुशील बाकलीवाल said...

आपने बिल्कुल एक नये व उपेक्षित वर्ग की ओर जनसामान्य का ध्यान आकृष्ट किया है । उम्मीद है इस वर्ग के प्रति आपकी सोच सार्थक रुप ले सकेगी । आभार सहित...

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (26.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

अजय कुमार दूबे said...

सराहनीय प्रयास ......
ऐसे ही लिखती रहे . आभार

Patali-The-Village said...

बहुत अच्छा और विचारणीय लेख|धन्यवाद|

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) http://cartoondhamaka.blogspot.com/ said...

बहुत अच्छा और विचारणीय लेख|ऐसे ही लिखती रहे . आभार!

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/ Dr. Purushottam Meena 'Nirankush' said...

आदरणीय कृति जी,
नमस्कार|
आपने मेरे ब्लॉग पर अपने आपको नया बतलाया है|

यद्यपि आपने मेरे मेरे ब्लॉग पर जो टिप्पणी दी वह पूरी तरह से औपचारिक और केवल स्वयं के ब्लॉग का प्रचार करने के लिये ही सौद्देश्य लिखी गयी प्रतीत होती है|

इसके उपरान्त भी आपके प्रस्तुत आलेख को पढकर ज्ञात होता है कि न तो आप नयी हैं और न हीं अपनी टिप्पणी की तरह से आप पूरी तरह औपचारिक हैं, बल्कि आप बेहद संजीदा और संवेदनशील इंसान हैं|

आपने अपने तरीके से मंगलामुखियों के मुद्दे को उठाया है| आपकी चाहत और सोच को कोई भी गलत नहीं ठहरा सकता कि शिक्षा पर सभी का हक होना चाहिये| लेकिन कृति जी क्या शिक्षा सभी समस्याओं का हल है?

कम से कम मंगलामुखियों की समस्या का हल शिक्षा से हो सकेगा, इसमें मुझे तो सन्देह है| आज शारीरिक रूप से सक्षम स्त्री-पुरुष शिक्षा प्राप्त करने के बाद अधिक क्रूर, अधिक भ्रष्ट, अधिक शोषक, अधिक चालाक और अधिक अमानवीय बनते जा रहे हैं| ऐसे में शिक्षा को सभी सुसंस्कारों और उन्नति का एकमात्र आधार मानना सन्देहास्पद लगता है|

बहुत से लोग इसके लिये शिक्षा की गुणवत्ता एवं पद्धति में दोष निकालते हैं, जबकि दूसरे लोग सरकार की नीतियों में और शेष कुछ इसे समय का बदलाव कहते हैं| जबकि स्वयं के अन्दर झॉंकने और अपने दोषों की ओर नहीं देखने की हमारी प्रवृत्ति असल समस्या है| जिसकी ओर कोई देखना नहीं चाहता| जैसे आत्मालोचन करना आता ही नहीं!

आदरणीय कृति जी कोई भी मंगलामुखी जब तक समाज के माहौल में स्वीकार्य नहीं होगा, तब तक उसे सरकारी नौकरी से क्या हासिल होने वाला है? मध्य प्रदेश में इन्हीं में से एक विधायक भी चुनी जा चुकी है|

मुझे आपके लेख की सबसे अच्छी बात ये लगी कि आपने इस समाज की तकलीफों की ओर पूरी संजीदगी से झांकने का प्रयास किया है, हालांकि किसी के विश्‍वास को जिन्दा रखने की खातिर आप बहुत सी चीजों का छुपा गयी और अन्त में आपने ब्लॉग पर अपने-आपका जो परिचय लिखा है, वह आपके जिन्दादिल इंसान होने का जीवन्त प्रमाण है|

आशा है कि आगे भी ऐसे ही लिखती रहेंगी|

बधाई और शुभकामनाएँ|

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित हिन्दी पाक्षिक) तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
फोन : 0141-2222225 (Between 07 To 08 PM) मोबाइल : 098285-02666

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत अच्छा मुद्दा उठाया आपने... बधाई!

आपको यह जान कर प्रसन्नता होगी कि इन दिनों मेरे शहर की महापौर कमला किन्नर हैं जिन्हें सभी स्नेहवश बुआजी कहते हैं। वे बहुमत से चुनाव जीती थीं और आज सफलतापूर्वक नगरनिगम का कार्य संचालित कर रही हैं।

madansharma said...

बहुत अच्छा और विचारणीय लेख|धन्यवाद

संजय भास्कर said...

विचारणीय लेख पर अवश्य ही सरकारों को ध्यान देना चाहिए.

alok dixit said...

सही कहा आपने... आरक्षण का असली मकसद अभी तक पूरा नहीं हुआ है.

Dr Varsha Singh said...

विचारणीय लेख ...

vivek tripathi said...

Krati, issue you raised is really want serious attention. Government should consider. keep it up.

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

कृति जी, आपने सच में बहुत ही बेबाक ढंग से इस थर्ड जेण्डर के लोगों की सच्चाई को लोगों के सामने प्रस्तुत किया है। वैसे मैं चाहूंगा कि आप एक बार प्रदीप जी का तीसरी ताली और डोमिनीक लापियेर का आनन्द नगर जरूर पढ़ें---चूंकि इस विषय और इस समुदाय के बारे में आप भी सोचती हैं। शुभकामनायें।

पूनम श्रीवास्तव said...

बहुत ही शोध परक और अच्छा लेख है आपका ---आप जैसी प्रखर और रचनाशील लेखिकाएं जब इस दिशा में सोच रही हैं,लिख रही हैं तो निश्चित ही समाज के इस वर्ग को भी समाज में उचित सम्मान मिलेगा.हार्दिक शुभकामनायें.---पूनम श्रीवास्तव

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